विद्यार्थी भारत का भविष्य, विश्व का गौरव और अपने माता-पिता की शान है । उसके भीतर सामर्थ्य का असीम भंडार छुपा हुआ है । जिसे प्रगट करने के लिए जरुरी है- उत्तम संस्कारों का सिंचन, उत्तम चारित्रिक शिक्षा एवं भारतीय संस्कृति के गौरव से उसका परिचय करवाना ।
बाल्यकाल के संस्कार एवं चरित्र निर्माण ही मनुष्य के भावी जीवन की आधारशिला है । समितियों द्वारा बाल विकास की विभिन्न सेवा प्रवृत्तियाँ चलायी जाती है । जिससे बच्चों का सर्वांगीण विकास हो और आगे चलकर देश व समाज की सेवा करें । जो एक राष्ट्र की शक्ति को मजबूत करने का महानतम कार्य है ।
बाल संस्कार केंद्र :
पूज्य बापूजी बच्चों को संस्कारवान, चरित्रवान, बनाने के लिए विशेष ध्यान देते हैं । बच्चे स्वस्थ रहें, बुद्धिमान व संयमी बनें और उनका भविष्य उज्ज्वल बने इस हेतु पूज्यश्री ने अनेक सेवा-प्रवृत्तियाँ शुरू करवायीं । इसीके तहत श्री योग वेदांत सेवा समितियों द्वारा देश-विदेश में हजारों बाल संस्कार केंद्र निःशुल्क चलाये जा रहे हैं । इनमें बालकों को माता-पिता का आदर करने के संस्कार, पढ़ाई में अव्वल होने के उपाय और यौगिक प्रयोग आदि सिखाये जाते हैं ।
विद्यार्थी उज्ज्वल भविष्य निर्माण शिविर :
विद्यार्थियों की छुट्टियों का सदुपयोग कर उन्हें संस्कारवान, बुद्धिमान, उद्यमी, परोपकारी बनाने समितियों द्वारा ‘विद्यार्थी उज्ज्वल भविष्य निर्माण शिविरों’का आयोजन किया जाता है ।
योग व उच्च संस्कार शिक्षा कार्यक्रम :
योग व उच्च संस्कार शिक्षा अभियान के अंतर्गत समितियों द्वारा विद्यालयों में जाकर कार्यक्रम किये जाते हैं, जिनमें विद्यार्थियों को माता-पिता एवं गुरुजनों का आदर जैसे उच्च संस्कार, योगासन, प्राणायाम, सूर्यनमस्कार, स्मरणशक्ति एवं बुद्धि शक्ति वर्धक प्रयोग, आदर्श दिनचर्या, परीक्षा में अच्छे अंक पाने की कुंजियाँ आदि महत्त्वपूर्ण पहलुओं पर अनुभवी वरिष्ठों द्वारा मार्गदर्शन दिया जाता है । इस कार्यक्रम के अच्छे परिणामों को देख प्रधानाचार्यों, शिक्षण संस्थापकों द्वारा इसकी माँग और बढ़ रही है ।